Tuesday, 1 September 2015

आसान हेल्थ टिप्स



15 आसान हेल्थ टिप्स

इन दिनों लोगों ने अपनी लाइफस्टाइल ऐसी बना ली है कि दिनों दिन वे नई-नई परेशानियों और बीमारियों से घिरते जा रहे हैं। चाहे खान-पान हो या आरामदायक जीवनशैली। और तो और शहरी वातावरण भी उन्हें इस तरह की दिनचर्या बनाने में काफी मदद की है। सभी ऐशोआराम की चीजें उन्हें घर बैठे हासिल हो जाती है। उन्हें उठकर कहीं जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती। नतीजा.... 

 
जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां। आइए नये साल पर अपनी आरामदायक जीवनशैली को बदलने के लिए कुछ संकल्प लें। यहां 15 आसान हेल्थ टिप्स दिये जा रहें हैं जिन्हें अपनाकर आप अपनी फिगर को मेंटन तो कर ही सकती हैं। साथ ही इन्हें अपनाकर आप दिन भर तरोताजा भी महसूस करेंगीं।

  1. प्रतिदिन वॉक करें। अगर हो सके तो फुटबॉल खेलें यह एक प्रकार का एक्सरसाइज ही है।
  2. ऑफिस में या कहीं भी जाएं तो लिफ्ट के बदले सीढिय़ों का इस्तेमाल करें।
  3. अपने कुत्ते को वॉक पर खुद लेकर जाएं। बच्चों के साथ खेलें, लॉन में नंगे पांव चलें, घर के आसपास पेड़ पौधे लगाऐं, यानि कि वो सब करें जिनसे आप खुद को एक्टिव रख सकें। 
  4. ऐसी जगह एक्सरसाइज न करें जहां भीड़भाड़ ज्यादा हो।
  5. तले-भुने भोजन, और अन्य फैटी चीजों से परहेज करें यह बहुत से बीमारियों की जड़ होती है। 
  6. डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें। जैसे कि चीज, कॉटेज चीज, दूध और क्रीम का लो फैट प्रोडक्ट आदि। 
  7. यदि खाना ही है तो, मक्खन ,फैट फ्री चीज और मोयोनीज का लो फैट उत्पाद प्रयोग में लाऐं।
  8. तनाव हमारी जिंदगी में काफी निगेटिव असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव कम करने के लिए सकारात्मक विचार बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। 
  9. तनाव कम करने के लिए रोज कम से कम आधा घंटा ऐसे काम करें, जिसे करने में आपको मन लगता हो। 
  10. तनाव कम करने के लिए आप योग का भी सहारा ले सकते हैं।
  11. गुस्सा तनाव बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है इसलिए गुस्सा आने पर स्वंय को शांत करने के लिए एक से दस तक गिनती गिनें। 
  12. उन लोगों से दूर रहने की कोशिश करें जो आपके तनाव को बढ़ाते हों।
  13. धूम्रपान से परहेज करें। धूम्रपान से शरीर और उम्र पर असर तो पड़ता ही है, साथ ही फेफड़ों का कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी भी हो सकती है।
  14. धूम्रपान में कमी लाने के लिए उसकी तलब लगने पर सौंफ आदि का सेवन करें।
  15. मार्केट में भी आजकल बहुत से प्रोडक्ट मिलने लगे हैं जो धूम्रपान की तलब को कम करते हैं।

Thursday, 20 August 2015

स्पर्श का प्रभाव देखें

स्पर्श का प्रभाव देखें
जब किसी बीमारी से ग्रस्त हों और परम्परागत आयुर्वेदिक औषधि ले रहे हों तो औषधि का प्रभाव बढ़ाने के लिए यह भी कर सकते हैं। औषधि से संबंधित घटक से जुड़े पौधे की पत्ती अपने बूट में रख कर बूट पहन लें। इससे आपके तलवों को स्पर्श करती हुई पत्ती फायदा देगी। सर्दी-जुकाम हो तो गर्म तासीर वाली पत्ती अथवा गर्मी हो तो ठण्ढी तासीर वाली पत्ती का इस्तेमाल करें। पत्तियों का संबंध ग्रहों से भी होता है। बीमारी निवारण या कार्य सिद्धि के लिए अपनी राशि या नक्षत्र से संबंधित पेड़ की पत्ती अथवा जड़ को अपनी जेब में रखें या भुजा/गले में बाँध लें। इससे बीमारी का निवारण होने के साथ ही कार्य संपादन में सफलता मिलने में आसानी रहती है। ख़ासकर अपामार्ग की जड़ अपने साथ रखने से हर प्रकार के काम जल्द ही सिद्ध होते हैं

सर्दी-खांसी-जुकाम का घरेलू ईलाज

सर्दी-खांसी-जुकाम का घरेलू ईलाज

मौसम बदल रहा है और इस बदलते मौसम में अगर हमें कोई बीमारी सबसे ज्यादा परेशान करती है तो वह है सर्दी, खांसी और जुकाम। लेकिन परेशान होने की कोई जरूरत नहीं, क्योंकि हमारे घर में ही कई ऐसी चीजें हैं, जो इससे आसानी से निजात दिला सकती हैं। आइए राजेश मिश्रा के सौजन्य से जानें, उन घरेलू नुस्खों के बारे में:
अदरक वाली चाय : सर्दी-जुकाम में तो अदरक की चाय पीने की सलाह हमारी दादियां-नानियां देती ही हैं। और यह सलाह गलत भी नहीं होती है। अदरक की एक अच्छी सी चाय आपको सर्दी से लड़ने की जबर्दस्त ताकत देती है।
हल्दी और दूध : अदरक और मसाला चाय को भूल भी जाएं तो, दूध और हल्दी का मिक्स्चर भी आपकी सर्दी को ठीक कर सकता है। सबसे बड़ी बात इसे बच्चे, बूढ़े या जवान कोई भी ले सकते हैं।

जीभ पर हों छाले तो

जब जीभ पर हों छाले तो
मुंह के छाले या जुबान पर छाले होने के लिए शरीर में बढ़ने वाली गर्मी जिम्मेदार होती है। ऐसे में कोशि‍श करें कि दिनभर में हर थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें, ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। इससे छालों के दर्द में भी आराम मिलेगा।
नमक को पानी में मिलाकर गरारे करें, ताकि मुंह साफ रहे और ठंडी चीजों का अधिक से अधिक सेवन करें। दही, छाछ और फलों का जूस पिएं या फिर आइसक्रीम से भी आपको राहत मिल सकती है।
गरम चीजों को खाने से बचें और तीखा व मसालेदार भोजन भी न करें। इससे छालों में दर्द तो होगा ही, छाले ठीक होने में उतना ही वक्त भी लगेगा। खाने में नमक का इसतेमाल भी कम ही करें।
चाय-कॉफी जैसी चीजों से दूरी बनाए रखें। यह चीजें कब्जियत पैदा करेंगी, जिससे पेट साफ न होने के कारण छालों की समस्या ठीक होने के बजाए बढ़ जाएगी। कोल्ड्र‍िंक भी आपको बचना चाहिए।
ज्यादा बात करने से बचें, ताकि नुकीले दांतों के लगने से घाव अधि‍क न बढ़े। समय- समय पर कुल्ला करते रहें और चाहें तो माउथवॉश का इस्तेमाल करें, ताकि बैक्टीरिया न पनपे और छाले जल्दी ठीक हो सकें।
-- कत्था लगाये जीभ पर |
-- मंजुफल का चूर्ण लगाये |
-- शहद लगाकर पानी बहार छोड़े |
-- ग्लिसरीन लगा कर पानी बहार छोड़े |
-- पेट को साफ रखे ..कब्ज ना होने दे |त्रिफला चूर्ण लेवे |

दाढी उगाने का नुस्खा


 दाढी उगाने का नुस्खा
रात को सोने से पहले दूध पर जमी मलाई कप हथेली पर अच्छी तरह से मसलकर चिकनाई बनाकर दाढ़ी पर लगाएं सुबह उठकर धो लें

जोड़ों के दर्द का घरेलु इलाज़ .............

जोड़ों के दर्द का घरेलु इलाज़ .............
जोड़ों के दर्द के लिए रामबाण है यह तेल बाजार में सैकडों दर्द
निवारक तेल बिक रहे हैं और किस तेल का कितना असर है कोई वैज्ञानिक साक्ष्य
नहीं ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं, आप खुद ही घर पर बैठकर एक अच्छा दर्द
निवारक तेल तैयार कर सकते हैं। आदिवासियों के ज्ञान पर आधारित इस नुस्खे के
क्लिनिकल प्रमाण भी चौंकाने वाले हैं।
काली उडद (करीब 10 ग्राम), बारीक पीसा हुआ अदरक (4ग्राम) और पिसा हुआ कर्पूर
(2 ग्राम) को खाने के तेल (50 मिली) में 5 मिनिट तक गर्म किया जाए और इसे छानकर
तेल अलग कर लिया जाए। जब तेल गुनगुना हो जाए तो इस तेल से दर्द वाले
हिस्सों या जोड़ों की मालिश, जल्द ही दर्द में तेजी से आराम मिलता है, ऐसा दिन में 2 से 3
बार किया जाना चाहिए। यह तेल आर्थरायटिस जैसे दर्दकारक रोगों में भी गजब
काम करता है।

मूत्र कष्ट - इलाज पेशाब में रुकावट

5 मिनट में इलाज।
मूत्र कष्ट - पेशाब में रुकावट।
अगर किसी भी कारण से पेशाब नहीं उतर रहा या बूँद बूँद
उतर रहा हैं तो इसके लिए एक रामबाण इलाज हैं फिटकरी।
एक गिलास पानी में थोड़ी फिटकरी घोल कर पीले, 5 से
10 मिनट में पेशाब उतर आएगा वह भी बिना रुकावट के।
फिटकरी इतनी घोल ले के पानी थोड़ा खारा सा हो
जाए।
अगर पथरी भी हैं वो भी ये प्रयोग 3 से 4 दिन करने से निकल
जाएगी।
ये इलाज मैंने कई लोगो पर आजमाया हैं और पूर्ण सफलता
पायी हैं।

Wednesday, 19 August 2015

  कालीमिर्च लेने से लाभ
1.-यदि आपका ‪‎ब्लडप्रेशर लो रहता है, तो प्रतिदिन 3 दाने कालीमिर्च के साथ 21 दाने ‪‎किशमिश‬ का सेवन करे।
2- जुकाम होने पर कालीमिर्च के 5 दाने पीसकर एक कप ‪#‎दूध में पकाकर सुबह-शाम लेने से लाभ मिलता है।
3- एक चम्मच शहद में 2-3 बारीक कुटी हुई कालीमिर्च और एक चुटकी ‪#‎हल्दी‬ पाउडर मिलाकर लेने से ‪#‎कफ‬ में राहत मिलती है।
4- इससे शरीर की ‪#‎थकावट‬ दूर होती है। कालीमिर्च से गले की खराश दूर होती है।
5- इससे रक्त संचार सुधरता है।यह ‪#‎दिमाग‬ के लिए फायदेमंद होती है। गैस के कारण पेट फूलने पर कालीमिर्च असरदार होती है। इससे ‪#‎गैस‬ दूर होती है।
6-कालीमिर्च की ‪#‎चाय‬ पीने से ‪#‎सर्दी‬-‪#‎ज़ुकाम‬, ‪#‎खाँसी‬ और ‪#‎वायरल‬ ‪#‎इंफेक्शन‬ में राहत मिलती है। कालीमिर्च ‪#‎पाचनक्रिया‬ में सहायक होती है।
7- कालीमिर्च सभी प्रकार के संक्रमण में लाभ देती है।पित्ती उछलने पर 10 कालीमिर्च को पिसकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को आधा चम्मच घी में मिलाकर पीएं और इससे शरीर की मालिश करें। इससे पित्ती उछलना ठीक होती है।

Sunday, 16 August 2015

पेट में गैस आयुर्वेदिक नुस्खेँ

पेट में गैस आयुर्वेदिक नुस्खेँ

आज छोटी उम्र से ही व्यक्ति कई बीमारियों से ग्रस्त है। जैसे कब्ज़, गैस, कमर दर्द, त्वचा के रोग, रक्त चाप, दांत संबंधी रोग.... ये कुछ एसी बीमारियां हैं जिनसे दुनिया का लगभग हर दूसरा व्यक्ति हैरान-परेशान है। जिसे पेट की कोई भी समस्या न हो ऐसा व्यक्ति तो दिन के उजाले में भी ढूढना मुश्किल जान पड़ता है !

वास्तविकता यही है कि आधुनिक जीवनशैली पर चलने वाला हर एक व्यक्ति आज किसी न किसी शारीरिक या मानसिक बीमारी से ग्रस्त है।  इन सामान्य दिखने वाली बेहद घातक बीमारियों से बचने के लिए आप के सामने प्रस्तुत हैं दादी माँ के कुछ नुस्खे जो कि 100 फीसदी कारगर तो हैं ही साथ ही इनका कोई भी साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। आज हम देखेंगे कि पेट संबंधी प्रमुख समस्या गैस से निजात पाने के लिये हमारी अनुभवी दादी या नानी अपने किचन से क्या अचूक उपाय बताती है...

1. गैस की समस्या से निजात पाने के लिए काली मिर्च और नमक को पीस कर पानी के साथ लेने से लाभ होता है

2. मट्ठा, हींग, सोंठ, गुड आदि पाचन में बेहद सहायक चीजों का सेवन करने से यह बीमारी जड़ से चली जाती है ।

3. एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नीबू, थोड़ा सा काला नमक, सिका हुआ जीरा और थोडी सी हींग मिलाकर लेने से गैस की तकलीफ में तत्काल राहत मिलती है।

दांत दर्द के लिए कारगर आयुर्वेदिक नुस्खेँ

दांत दर्द के लिए कारगर आयुर्वेदिक नुस्खेँ
दांत दर्द के लिए कारगर उपचार 10 ग्राम बायविडंग और 10 ग्राम सफेद फिटकरी थोड़ी कूटकर तीन किलो पानी में उबालें। एक किलो बचा रहने पर छानकर बोतल में भरकर रख लें। तेज दर्द में सुबह तथा रात को इस पानी से कुल्ला करने से दो दिन में ही आराम आ जाता है। कुछ अधिक दिन कुल्ला करने से दाँत पत्थर की तरह मजबूत हो जाते हैं। अमरूद के पत्ते के काढ़े से कुल्ला करने से दांत और दाढ़ की भयानक टीस और दर्द दूर हो जाता है। प्रायः दाढ़ में कीड़ा लगने पर असहय दर्द उठता है। काढ़ा तैयार करने के लिए पतीले में पानी डालकर उसमें अंदाज से अमरूद के पत्ते डालकर इतना उबालें कि पत्तों का सारा रस उस पानी में मिल जाए और वह पानी उबाले हुए दूध की तरह गाढ़ा हो जाए। दांत-दाढ़ दर्द में अदरक का टुकड़ा कुचलकर दर्द वाले दांत के खोखले भाग में रखकर मुंह बंद कर लें और धीरे-धीरे रस चूसते रहें। फौरन राहत महसूस होगी।

औषधीय गुणों से भरपूर चाय

औषधीय गुणों से भरपूर चाय
काली चाय

पातालकोट अक्सर आना जाना लगा रहता है और यहां आदिवासियों के बीच चाय मेहमान नवाज़ी का एक अहम हिस्सा है। जबरदस्त मिठास लिए ये चाय बगैर दूध की होती है और चाय की चुस्की लेते हुए जब इन आदिवासियों से इस चाय की ज्यादा मिठास की वजह पूछी जाए तो जवाब भी उतना ही मीठा मिलता है, 'आपके और हमारे बीच संबंधों में इस चाय की तरह मिठास बनी रहे'। खैर, इस चाय को तैयार करने के लिए 2 कप पानी में एक चम्मच चाय की पत्ती और 3 चम्मच शक्कर को डालकर उबाला जाता है। जब चाय लगभग एक कप शेष रह जाती है, इसे उतारकर छान लिया जाता है और परोसा जाता है। हर्बल जानकारों के अनुसार मीठी चाय दिमाग को शांत करने में काफी सक्रिय भूमिका निभाती है यानि यह तनाव कम करने में मदद करती है। आधुनिक शोध भी चाय के इस गुण को प्रमाणित करते हैं। सच ही है, यदि चाय की एक मिठास रिश्तों में इस कदर मजबूती ले आए तो अपने आप हमारे जीवन से तनाव छू मंतर हो जाए। 

गौती चाय

बुंदेलखंड में आपका आदर सत्कार अक्सर गौती चाय या हरी चाय से किया जाता है। लेमन ग्रास के नाम से प्रचलित इस चाय का स्वरूप एक घास की तरह होता है। हल्की सी नींबू की सुंगध लिए इस चाय की चुस्की गजब की ताजगी ले आती है। लेमन ग्रास की तीन पत्तियों को हथेली पर कुचलकर दो कप पानी में डाल दिया जाता है और उबाला जाता है। स्वादानुसार शक्कर डालकर इसे तब तक उबाला जाता है जब तक कि यह एक कप बचे। जो लोग अदरख का स्वाद पसंद करते हैं, वे एक चुटकी अदरख कुचलकर इसमें डाल सकते हैं। इस चाय में भी दूध का उपयोग नहीं होता है। गौती चाय में कमाल के एंटी ओक्सीडेंट गुण होते हैं और शरीर के अंदर किसी भी प्रकार के संक्रमण को नियंत्रित करने में गौती चाय काफी असरकारक होती है। यह चाय मोटापा कम करने में काफी सक्षम होती है। आधुनिक शोध भी इस तथ्य को प्रमाणित करते दिखाई देती है। हरी चाय वसा कोशिकाओं यानि एडिपोसाईट्स के निर्माण को रोकती है। इसी वजह से दुनिया के अनेक देश गौती चाय को मोटापा कम करने की औषधि के तौर पर देख रहें हैं और इस पर निरंतर शोध जारी है। नई शोधें बताती है कि वसा और कोलेस्ट्राल को कम करने वाले प्रोटीन काईनेस को क्रियाशील करने में गौती चाय महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

खट्टी गौती चाय

गौती चाय बनाते समय इसी चाय में संतरे या नींबू के छिल्के डाल दिये जाते हैं और कुछ मात्रा नींबू रस की भी डाल दी जाती है और फिर परोसी जाती है खट्टी गौती चाय। इस तरह की मेहमानी आप देख सकते हैं मध्यभारत के गोंडवाना क्षेत्र में। मूल रूप से गोंड, कोरकु और बैगा जनजातियों के बीच प्रचलित इस चाय के भी गजब के औषधीय गुण हैं। गाँव के बुजुर्गों से उनकी लंबी उम्र का राज पूछा जाए तो सीधा जवाब मिलता है, 'खट्टी गौती चाय' और मजे की बात यह भी है कि सदियों पुराने इस एंटी एजिंग फार्मुले को आदिवासी अपनाते रहें हैं और अब आधुनिक विज्ञान इस पर ठप्पा लगाना शुरु कर रहा है। नई शोधें बताती है कि हरी चाय और नींबू का मिश्रण उम्र के पड़ाव की प्रक्रिया को धीमा कर देता है यानि आप इस चाय का प्रतिदिन सेवन करें तो अपने यौवन को लंबा खींच सकते हैं।

मसाला चाय

गुजरात में किसी भी गाँव में जाएंगे तो मेहमानी के तौर पर मसाला चाय आपके स्वागत के लिए हमेशा तत्पर रहेगी। घरों में अक्सर मेहमान नवाज़ी के लिए छाछ या चाय का उपयोग किया जाता है। यदि आप चाय के शौकीन हैं तो आपको मसाला चाय परोसी जाएगी। काली मिर्च, सौंठ, तुलसी, दालचीनी, छोटी इलायची, बड़ी इलायची, लौंग, पीपरामूल, जायफ ल, जायपत्री और लौंग मिलाकर एक मसाला तैयार होता है। चाय पत्ती और दूध के उबलते पानी में चुटकी भर मसाला डाल दिया जाता है। स्वादिष्ठ मसाला चाय जब आपको परोसी जाती है, ना सिर्फ  ये गज़ब का स्वाद लिए होती है बल्कि शरीर ताजगी से भरपूर हो जाता है। मसालों के औषधीय गुणों से हम सभी 'गाँव कनेक्शन' के पिछले अंकों में रूबरू हो चुके है, यानि इन सभी मसालों का संगम जिस चाय में होगा, उसके औषधीय गुण भी कमाल के होंगे ही।

बस्तर की सैदी या मीठी चाय

शहद होने की वजह से इस चाय को शहदी चाय या सैदी चाय कहा जाता है। दंतेवाड़ा के किसी दुरस्थ गाँव में आप जाईये, आपका स्वागत सैदी चाय से होगा। साधारण चाय पत्ती (2 चम्मच) के साथ कुछ मात्रा में शहद (लगभग 2 चम्मच) और दूध (2 चम्मच) डालकार फेंटा जाता है। दूसरी तरफ  एक बर्तन में 2 कप पानी को उबाला जाता है। पानी जब उबलने लगे तो इसमें इस फेंटे हुए मिश्रण को डाल दिया जाता है। यदि आवश्यकता हो तो थोड़ी सी मात्रा अदरख की डाल दी जाती है और तैयार हो जाती है सैदी चाय। माना जाता है कि यह चाय शरीर में गजब की स्फू र्ति लाती है। शहद, अदरक और चाय के अपने-अपने औषधीय गुण है और जब इनका संगम होता है तो ये गजब का टोनिक बन जाते हैं।


धनिया चाय

राजस्थान के काफी  हिस्सों में धनिया की चाय स्वास्थ्य सुधार के हिसाब से दी जाती है। लगभग 2 कप पानी में जीरा, धनिया, चायपत्ती और कुछ मात्रा में सौंफ  डालकर करीब 2 मिनिट तक खौलाया जाता है, आवश्यकतानुसार शक्कर और अदरख डाल दिया जाता है। कई बार शक्कर की जगह शहद डालकर इसे और भी स्वादिष्ठ बनाया जाता है। गले की समस्याओं, अपचन और गैस से त्रस्त लोगों को इस चाय का सेवन कराया जाता है। स्वाद के साथ सेहत भी बेहतर करने वाली इस चाय को धनिया चाय के नाम से जाना जाता है।

मुलेठी चाय

सौराष्ट्र में जेठीमद चाय के नाम मशहूर इस चाय को मध्यभारत में मुलेठी चाय के नाम से जाना जाता है। साधारण चाय तैयार करते समय चुटकी भर मात्रा मुलेठी की डाल दी जाए तो चाय में एक नयी तरह की खुश्बु का संचार होता है और चाय स्वादिष्ठ भी लगती है। दमा और सर्दी खांसी से परेशान लोगों को इस चाय को प्रतिदिन दिन में दो से तीन बार लेना चाहिए, माना जाता है कि मुलेठी के गुणों की वजह से चाय सेहत के हिसाब से अत्यंत लाभकारी होती है।

बर्फीली चाय

गर्मियों की तपिश और लू के चपेटों से बचने के लिए पानी में एक नींबू का रस, थोड़ी सी चायपत्ती और लेमनग्रास डालकर उबाला जाए और ठंडा करके रेफ्रिजरेट किया जाए। जब यह चाय बिल्कुल ठंडी हो जाए तो इसमें बर्फ  के कुछ डालकर पिया जाए तो ताजगी के साथ शरीर में ऊर्जा का संचार भी होता है। यह चाय सेहत के लिए भी बेहतर होती है।


अनंतमूली चाय

पातालकोट में सर्द दिनों में अक्सर आदिवासी अनंतमूली चाय पीते हैं। अनंतमूल स्वभाव से गर्म प्रकृति का पौधा होता है, इसकी जड़ें निकालकर लगभग 1 ग्राम साफ  जड़ पानी में खौलायी जाती है। इसी पानी में थोड़ी सी चाय की पत्तियों को भी डाल दिया जाता है। दमा और सांस की बीमारी से ग्रस्त रोगियों को इसे दिया जाता है। जब ज्यादा ठंड पड़ती है तो इसी चाय का सेवन सभी लोग करते हैं, माना जाता है कि यह चाय शरीर में गर्मी बनाए रखती है। अनंतमूल का उपयोग करने की वजह से इसे अनंतमूली चाय के नाम से जाना जाता है।

पौष्टिक नारियल पानी

पौष्टिक नारियल पानी

नारियल के पानी में दूध से ज्यादा पोषक तत्व होते हैं क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रोल और वसा की मात्रा नहीं है। नारियल पानी में बेहद गुण पाए जाते हैं। इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट और पोटेशियम पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर और दिल की गतिविधियों को दुरुस्त करने में सहयोगी होता है। इसके इस्तेमाल से रक्त स्राव तेज गति से काम करता है और पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है।

नारियल का पानी न केवल शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है बल्कि शरीर में मौजूद बहुत से वायरसों से भी लड़ाई करता है। अगर आपको किडनी में पथरी की समस्या है तो यह आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। नारियल का पानी लगातार सेवन करने से किडनी में मौजूद पथरी अपने आप खत्म हो जाती है।

अगर आपको किडनी से संबंधित अन्य कोई समस्या हो तब भी फौरन एक गिलास नारियल पानी पी लीजिए, मिनटों में निजात मिल जाएगी। नशे को कम करने में भी नारियल पानी बहुत ही प्रभावी है।

पाँच मसाले जो अछि सेहत

पाँच मसाले जो अछि सेहत

सर्दी-खाँसी में गरम पानी से हल्दी की फँकी देने से आराम मिलता है तथा बलगम भी निकल जाता है। हल्दी एंटीबायटिक का काम भी करती है। इसे फेस पैक के रूप में बेसन के साथ लगाने से त्वचा में निखार आता है।

अदरक : यह पाचक है। पेट में कब्ज, गैस बनना, वमन, खाँसी, कफ, जुखाम आदि में इसे काम में लाया जाता है। अदरक का रस और शहद मिलाकर चाटते रहने से दमे में आराम मिलता है, साथ ही भूख भी बढ़ती है। यह पाचन ठीक करता है। नीबू-नमक से बना सूखा अदरक आप यात्रा में साथ रख सकते हैं।

मैथीदाना : मैथीदाना खून को पतला करता है, मल को बाँधता है। मधुमेह रोगी के लिए मैथीदाना रामबाण औषधि है। नित्य खाली पेट एक टी स्पून मैथी दाने का चूर्ण या आखा मैथी दाना पानी के साथ लेने से कब्ज व घुटने के दर्द में आराम मिलता है। साथ ही यह शरीर की अतिरिक्त चर्बी छाँटने में भी कारगर है। सर्दियों में यह बेहद फायदा करता है।

जीरा :जीरा पाचक और सुगंधित है। खाने में अरुचि, पेट फूलना, अपच आदि को दूर करता है। जीरा, अजवाइन पीसकर थोड़ा सा सेंधा नमक डालकर भोजन के बाद लेने से पाचन ठीक रहता है।
उल्टी की शिकायत भी बंद हो जाती है।

पेट व कमर कैसे कम करें

पेट व कमर कैसे कम करें

गलत ढंग से आहार-विहार यानी खान-पान, रहन-सहन से जब शरीर पर चर्बी चढ़ती है तो पेट बाहर निकल आता है, कमर मोटी हो जाती है और कूल्हे भारी हो जाते हैं। इसी अनुपात से हाथ-पैर और गर्दन पर भी मोटापा आने लगता है। जबड़ों के नीचे गरदन मोटी होना और तोंद बढ़ना मोटापे के मोटे लक्षण हैं।

मोटापे से जहाँ शरीर भद्दा और बेडौल दिखाई देता है, वहीं स्वास्थ्य से सम्बंधित कुछ व्याधियाँ पैदा हो जाती हैं, लिहाजा मोटापा किसी भी सूरत में अच्छा नहीं होता। बहुत कम स्त्रियाँ मोटापे का शिकार होने से बच पाती हैं।

हर समय कुछ न कुछ खाने की शौकीन, मिठाइयाँ, तले पदार्थों का अधिक सेवन करने वाली और शारीरिक परिश्रम न करने वाली स्त्रियों के शरीर पर मोटापा आ जाता है।प्रायः प्रसूति के बाद की असावधानी और गलत आहार-विहार करने से स्त्रियों का पेट बढ़ जाया करता है।

प्रसव के बाद 40 दिन तक पेट बाँधकर रखने से पेट बड़ा नहीं हो पाता। पेट बाँधने के बेल्ट बाजार में मिलते हैं। पहली कोशिश तो यही करना चाहिए कि पेट बढ़ने ही न पाए, क्योंकि एक बार पेट बढ़ जाने पर कम करना कठिन और समय साध्य कार्य हो जाता है। इसके लिए दो-तीन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। प्रायः महिलाएँ भोजन करके खूब पानी पिया करती हैं।

भोजन के अन्त में पानी पीना उचित नहीं, बल्कि एक-डेढ़ घण्टे बाद ही पानी पीना चाहिए। इससे पेट और कमर पर मोटापा नहीं चढ़ता, बल्कि मोटापा हो भी तो कम हो जाता है।

• आहार भूख से थोडा कम ही लेना चाहिए। इससे पाचन भी ठीक होता है और पेट बड़ा नहीं होता। पेट में गैस नहीं बने इसका खयाल रखना चाहिए। गैस के तनाव से तनकर पेट बड़ा होने लगता है। दोनो समय शौच के लिए अवश्य जाना चाहिए।

• भोजन में शाक-सब्जी, कच्चा सलाद और कच्ची हरी शाक-सब्जी की मात्रा अधिक और चपाती, चावल व आलू की मात्रा कम रखना चाहिए।

• सप्ताह में एक दिन उपवास या एक बार भोजन करने के नियम का पालन करना चाहिए। उपवास के दिन सिर्फ फल और दूध का ही सेवन करना चाहिए।

• पेट व कमर का आकार कम करने के लिए सुबह उठने के बाद या रात को सोने से पहले नाभि के ऊपर के उदर भाग को 'बफारे की भाप' से सेंक करना चाहिए। इस हेतु एक तपेली पानी में एक मुट्ठी अजवायन और एक चम्मच नमक डालकर उबलने रख दें। जब भाप उठने लगे, तब इस पर जाली या आटा छानने की छन्नी रख दें। दो छोटे नैपकिन या कपड़े ठण्डे पानी में गीले कर निचोड़ लें और तह करके एक-एक कर जाली पर रख गरम करें और पेट पर रखकर सेंकें। प्रतिदिन 10 मिनट सेंक करना पर्याप्त है। कुछ दिनो में पेट का आकार घटने लगेगा।

• सुबह उठकर शौच से निवृत्त होने के बाद निम्नलिखित आसनों का अभ्यास करें या प्रातः 2-3 किलोमीटर तक घूमने के लिए जाया करें। दोनों में से जो उपाय करने की सुविधा हो सो करें।

• भुजंगासन, शलभासन, उत्तानपादासन, सर्वागासऩ, हलासन, सूर्य नमस्कार। इनमें शुरू के पाँच आसनों में 2-2 मिनट और सूर्य नमस्कार पाँच बार करें तो पाँच मिनट यानी कुल 15 मिनट लगेंगे। इन आसनों की विधि वेबदुनिया के योग चैनल से प्राप्त की जा सकती है।
• भोजन में गेहूँ के आटे की चपाती लेना बन्द करके जौ-चने के आटे की चपाती लेना शुरू कर दें। इसका अनुपात है 10 किलो चना व 2 किलो जौ। इन्हें मिलाकर पिसवा लें और इसी आटे की चपाती खाएँ। इससे सिर्फ पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा।

• प्रातः एक गिलास ठण्डे पानी में 2 चम्मच शहद घोलकर पीने से भी कुछ दिनों में मोटापा कम होने लगता है।

दुबले होने के लिए दूध और शुद्ध घी का सेवन करना बन्द न करें। वरना शरीर में कमजोरी, रूखापन, वातविकार, जोड़ों में दर्द, गैस ट्रबल आदि होने की शिकायतें पैदा होने लगेंगी।ऊपर बताए गए उपाय करते हुए घी-दूध खाते रहिए, मोटापा नहीं बढ़ेगा। इस प्रकार उपाय करके पेट और कमर का मोटापा निश्चित रूप से घटाया जा सकता है। ये सब उपाय सफल सिद्ध हुए हैं।

बालतोड़ और पीलिया के युर्वेदिक नुस्खेँ

बालतोड़ और पीलिया के युर्वेदिक नुस्खेँ

बालतोड़ होना एक आम बात है, कुछ लोगों को किसी भी कारण शरीर से कोई बाल किसी कारण टूट जाए तो वहां एक बड़ा फो़ड़ा जैसा हो जाता है। इस फोड़े में पीप या पस बन जाता है। डॉक्टर के पास जाने पर वह एक चीरा लगाता है, तब यह ठीक होने लगता है। यह जब तक ठीक नहीं होता, जबर्दस्त तरीके से दुःखता है, व्यक्ति बेचैन रहता है।

इसका घरेलू इलाज इस प्रकार है- एक चम्मच मैदा व पाव चम्मच सुहागा डालकर जरा सा घी डालें और इसे आग पर पकाकर हलवे जैसा गाढ़ा बना लें। इसे पुल्टिस की तरह बालतोड़ पर रखकर सोते समय पट्टी बांध कर सो जाएं। दो-तीन बार ऐसा करने पर बालतोड़ ठीक हो जाएगा। पीलिया : घर में जमाया हुआ दही 250 ग्राम और फुलाई हुई फिटकरी 10 ग्राम, दोनों को मिलाकर एक बार सुबह और एक बार शाम को खाएं। अन्न न लें, सिर्फ दही और छाछ का सेवन करें और सात दिन तक बिस्तर पर आराम करें। पीलिया में यह नुस्खा बहुत ही कारगर सिद्ध हुआ है।

नमक का ये आसान प्रयोग कर देगा हर तरह के बुखार की छुट्टी

नमक का ये आसान प्रयोग कर देगा हर तरह के बुखार की छुट्टी

बदलते मौसम में बुखार की चपेट में आना एक आम बात है। कभी वायरल फीवर के नाम पर तो कभी मलेरिया जैसे नामों से यह सभी को अपनी चपेट में ले लेता है। फिर बड़ा आदमी हो या कोई बच्चा इस बीमारी की चपेट में आकर कई परेशानियों से घिर जाते हैं। कई बुखार तो ऐसे हैं जो बहुत दिनों तक आदमी को अपनी चपेट में रखकर उसे पूरी तरह से कमजोर बना देता है। पर घबराइए नहीं सभी तरह के बुखार की एक अचूक दवा है भुना नमक। इसके प्रयोग किसी भी तरह के बुखार को उतार देता है।

भुना नमक बनाने की विधि- खाने मे इस्तेमाल आने वाला सादा नमक लेकर उसे तवे पर डालकर धीमी आंच पर सेकें। जब इसका कलर कॉफी जैसा काला भूरा हो जाए तो उतार कर ठण्डा करें। ठण्डा हो जाने पर एक शीशी में भरकर रखें।जब आपको ये महसूस होने लगे की आपको बुखार आ सकता है तो बुखार आने से पहले एक चाय का चम्मच एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर ले लें। जब आपका बुखार उतर जाए तो एक चम्मच नमक एक बार फिर से लें। ऐसा करने से आपको बुखार कभी पलट कर नहीं आएगा।

विशेष :-

- हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों को यह विधि नहीं अपनानी चाहिए।


- यह प्रयोग एक दम खाली पेट करना चाहिए इसके बाद कुछ खाना नहीं चाहिए और ध्यान रखें कि इस दौरान रोगी  को ठण्ड न लगे।


- अगर रोगी को प्यास ज्यादा लगे तो उसे पानी को गर्म कर उसे ठण्डा करके दें।


- इस नुस्खे को अजमाने के बाद रोगी को करीब 48 घंटे तक कुछ खाने को न दें। और उसके बाद उसे दूध चाय या हल्का दलिया बनाकर खिलाऐं।

सादा बुखार

 सादे बुखार में उपवास अत्यधिक लाभदायक है। उपवास के बाद पहले थोड़े दिन मूँग लें फिर सामान्य खुराक शुरु करें। ऋषि चरक ने लिखा है कि बुखार में दूध पीना सर्प के विष के समान है अतः दूध का सेवन न करें।

पहला प्रयोगः सोंठ, तुलसी, गुड़ एवं काली मिर्च का 50 मि.ली काढ़ा बनाकर उसमें आधा या 1 नींबू निचोड़कर पीने से सादा बुखार मिटता है।

दूसरा प्रयोगः शरीर में हल्का बुखार रहने पर, थर्मामीटर द्वारा बुखार न बताने पर थकान, अरुचि एवं आलस रहने पर संशमनी की दो-दो गोली सुबह और रात्रि में लें। 7-8 कड़वे नीम के पत्ते तथा 10-12 तुलसी के पत्ते खाने से अथवा पुदीना एवं तुलसी के पत्तों के एक तोला रस में 3 ग्राम शक्कर डालकर पीने से हल्के बुखार में खूब लाभ होता है।

तीसरा प्रयोगः कटुकी, चिरायता एवं इन्द्रजौ प्रत्येक की 2 से 5 ग्राम को 100 से 400 मि.ली. पानी में उबालकर 10 से 50 मि.ली. कर दें। यह काढ़ा बुखार की रामबाण दवा है।

चौथा प्रयोगः बुखार में करेले की सब्जी लाभकारी है।

पाँचवाँ प्रयोगः मौठ या मौठ की दाल का सूप बनाकर पीने से बुखार मिटता है। उस सूप में हरी धनिया तथा मिश्री डालने से मुँह अथवा मल द्वारा निकलता खून बन्द हो जाता है।

लाभकारी औषधि सूखी सब्जियाँ

लाभकारी औषधि सूखी सब्जियाँ

  • गाजर को कद्दूकस कर सुखाकर पीस लें। इसे भी मसालादानी में रखें। प्रतिदिन मसालों के साथ इसका भी प्रयोग करें। विटामिन्स से भरपूर खाना प्रतिदिन खाएँ और खिलाएँ।
  • अदरक को काटकर, सुखाकर पीस लें। इसे भी मसालादानी में रखें। प्रतिदिन आप मसालों के साथ पिसी अदरक का भी उपयोग कर सकते हैं। चाय मसाले में भी इसे उपयोग में ला सकते हैं।
  • हरी मिर्च को काटकर सुखा लें। थोड़े-से तेल में सेंककर मिक्चर में मिलाएँ, स्वाद बढ़ जाएगा।
  • हरी मिर्च के डंठल तोड़कर सुखा लें। पीसकर पावडर बना लें। इसे भी मसालादानी में रखें। भिंडी, चतुरफली, बरबटी आदि सब्जियों के हरे रंग के लिए एवं मसालों के साथ इसका उपयोग करें।

मलेरिया,डेंगू का बुखार का इलाज

 मलेरिया,डेंगू का बुखार का इलाज
1. इन्द्रजौ, नागरमोथ, पित्तपापड़ा, कटुकी प्रत्येक का आधा से 1 ग्राम चूर्ण दिन में तीन बार खाने से मलेरिया तथा डेंगू में लाभ होता है।
2. तुलसी के हरे पत्तों तथा काली मिर्च को बराबर मात्रा में लेकर, बारीक पीसकर गुंजा जितनी गोली बनाकर छाया में सुखावें। 2-2 गोली तीन-तीन घण्टे के अन्तर से पानी के साथ लेने से  मलेरिया तथा डेंगू में लाभ होता है।
3. नीम अथवा तुलसी का 20 से 50 मि.ली. काढ़ा या तुलसी का रस 10 ग्राम और अदरक का रस 5 ग्राम पीने से मलेरिया तथा डेंगू में लाभ होता है।
4. करेले के 1 तोला रस में 2 से 5 ग्राम जीरा डालकर पीने से अथवा रात्रि में पुराने गुड़ के साथ जीरा खिलाने से लाभ होता है।
मलेरिया तथा डेंगू की अक्सीर (रामबाण) औषधिः
मलेरिया तथा डेंगू का बुखार लोगों को अलग-अलग प्रकार से आता है। मुख्यरूप से उसमें शरीर टूटता है, सिर दुःखता है, उल्टी होती है। कभी एकांतरा और कभी मौसमी रूप से भी मलेरिया तथा डेंगू का बुखार आता है और कई बार यह जानलेवा भी सिद्ध होता है।
इसकी एक सरल, सस्ती तथा ऋषिपरम्परा से प्राप्त औषधि हैः हनुमानजी को जिसके पुष्प चढ़ते हैं उस आकड़े की ताजी, हरी डाली को नीचे झुकाकर (ताकि दूध नीचे न गिरे) उँगली जितनी मोटी दो डाली काट लें। फिर उन्हें धो लें। धोते वक्त कटे हिस्से को उँगली से दबाकर रखें ताकि डाली का दूध न गिरे। एक स्टील की तपेली में 400 ग्राम दूध (गाय का हो तो अधिक अच्छा) गर्म करने के लिए रखें। उस दूध को आकड़े की दोनों डण्डियों से हिलाते जायें। थोड़ी देर में दूध फट जायेगा। जब तक मावा न तैयार हो जाये तब तक उसे आकड़े की डण्डियों से हिलाते रहें। जब मावा तैयार हो जाये तब उसमें मावे से आधी मिश्री अथवा शक्कर डालकर (इलायची-बादाम भी डाल सकते हैं) ठण्डा होने पर एक ही बार में पूरा मावा मरीज को खिला दें। किन्तु बुखार हो तब नहीं, बुखार उतर जाने पर ही खिलायें।
इस प्रयोग से मरीज को कभी दुबारा मलेरिया तथा डेंगू  नहीं होगा। रक्त में मलेरिया तथा डेंगू की 'रींग्स' दिखेंगी तो भी बुखार नहीं आयेगा और मलेरिया के रोग से मरीज सदा के लिए मुक्त हो जायेगा। 1 से 6 वर्ष के बालकों पर यह प्रयोग नहीं किया गया है। 6 से 12 वर्ष के बालकों के लिए दूध की मात्रा आधी अर्थात् 200 ग्राम लें और उपरोक्तानुसार मावा बनाकर खिलायें।
अभी वर्तमान में जिसे मलेरिया तथा डेंगू का बुखार न आता हो वह भी यदि इस मावे का सेवन करे तो उसे भी भविष्य में कभी मलेरिया तथा डेंगू न होगा। दिमाग के जहरी मलेरिया तथा डेंगू में भी यह प्रयोग अक्सीर इलाज का काम करता है। अतः यह प्रयोग सबके लिए करने जैसा है।